Théories d'intérêt (avec critiques) | Hindi | Prêt | Économie

Lisez cet article en hindi pour en savoir plus sur les quatre principales théories d’intérêt (avec critiques).

1. उत्पादकता सिद्धान्त ( théorie de la productivité marginale):

ब्याज है। सिद्धान्त का प्रतिपादन माल्थस, . बी. (JB Say) ने किया। उत्पादन उत्पादन।

हुई। है। क्रमिक है।

। की

, पूँजी की

में,

आलोचनाएँ ( critique):

के दोष हैं:

1. में

2. उत्पादकता

3. में अलग दर। को करता।

4. इस

2. का सिद्धान्त ( théorie de l'abstinence):

निर्धारण का प्रतिपादन प्रो. (Senior) किया था। ब्याज की है। है।

दुःख है। में, हैं। था इस

यदि करने है। के है। बचत है।

आलोचना ( critique):

में निम्न दोष हैं:

(i) बचत।।

(ii) को; द्वारा चाहिए। वास्तव है।

(iii) में है है। भी है।

3. सिद्धान्त ( théorie de l'attente):

ने है। अनुसार, एक ऐसी बन्द अर्थव्यवस्था (économie fermée) हैं।

में कभी अत्युत्पादन (Sur-Production) बेरोजगारी होती। में।। करने का - सहना। के है।

उपभोग के के, स्थान स्थान Wait (En attente) का प्रयोग।। के अनुसार, पुरस्कार है।

वर्तमान में के है।

इस इस

4. अधिमान सिद्धान्त ( Théorie des préférences temporelles):

सिद्धान्त के प्रतिपादन का श्रेय पो. रे (John Ray), (Bohm Bawerk) फ्शिर को जाता है। स्वाभाविक ऋण

में, । को रुपया, बीच है।

वर्तमान हैं। है। तभी मिले।

आलोचना ( critique):

इस दे। भी है।

 

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