Essai sur la demande de produits de base | Hindi | Économie

Voici un essai sur la «demande de produits de base» pour les classes 9, 10, 11 et 12. Trouvez des paragraphes, des essais longs et courts sur la «demande de produits» spécialement écrite pour les étudiants des écoles et des collèges en langue hindi.

Essai sur la demande de produits de base


Contenu de l'essai:

  1. का अर्थ एवं परिभाषा (signification et définitions de la demande)
  2. की माँग का कारण (Causes des marchandises demandées)
  3. को प्रभावित करने वाले तत्व (facteurs influant sur la demande)
  4. के प्रकार (Types de demande)
  5. माँग का नियम (loi de la demande)
  6. माँग तालिका (calendrier de la demande)
  7. के नियम की व्याख्या (Explication de la loi de la demande)
  8. के नियम के अपवाद (Exceptions à la loi de la demande)


Essai n ° 1. माँग का अर्थ एवं परिभाषा (signification et définitions de la demande):

अर्थ (Signification):

के क्षेत्र में 'माँग' (Demande) एक (Pivot) की दी माँग के नियम Des Des (désir), Want (recherche) माँग (demande) मौलिक भेद समझ लें।

तीनों अलग अलग अनन्त है। प्रत्येक होती।

मनोवृत्ति (Psychologie humaine) से से साधन साधन साधन (Ressources limitées) की W (Veut)।

में, - Prix ​​de vente conseillé Prix (Prix) Prix de vente conseillé माँग

, माँग है। व्यक्ति आयेगा।

व्यक्ति

परिभाषाएँ (Définitions):

प्रो. ( Penson) अनुसार, "होते हैं:

(i) को प्राप्त की इच्छा,

(ii) के उपलब्धता तथा

iii) | की ”|

प्रो. की परिभाषा मुख्यतः

सन्दर्भ यह करती। के सकता।

प्रो. जे. एस. (JS Mill) अनुसार ”

प्रो. (Benham) अनुसार ”

प्रो. (Mayers) अनुसार, ""

का आवश्यक है:

(i) वस्तु की इच्छा (désir d'un bien)

ii) Su क्रय के लिए पर्याप्त साधन (ressources suffisantes pour acheter le bien)

(iii) व्यय करने की तत्परता (volonté de dépenser)

(iv) निश्चित कीमत (prix donné)

(v) समयावधि (Période donnée)


Essai n ° 2. माँग का कारण (Causes des biens demandés):

निहित है। को है। वस्तु वस्तु प्रयोग है।

माँग फलन ( fonction de demande):

माँग।

को सकता है:

यहाँ :

D x = f (P x, P r, Y, T)

D x = किसी (x) माँग

P x = x की कीमत

P r = वस्तुओं की कीमत

Y = की मौद्रिक आय

T = उपभोक्ता की रुचि

वस्तु के

प्रकार से दर्शाया गया है:

D x = f (P x )


Essai n ° 3. प्रभावित वाले Fact ( facteurs influant sur la demande):

प्रभावित तत्व हैं:

( i) वस्तु की उपयोगिता (utilité du bien):

का अभिप्राय है, की समता। गई वाली

ii) स्तर (niveau de revenu):

का पड़ता है। आय

( iii) का वितरण (Distribution de la richesse):

धन है। धन जैसे वैसे

iv) वस्तु की कीमत (prix du bien):

कीमत है। पर।

v) वस्तुओं की कीमतें (prix des produits connexes):

दो प्रकार की होती हैं:

une. स्थानापन्न वस्तुएँ (Biens de remplacement):

जिनका दूसरे;, चीनी-गुड़, -कॉफी आदि।

b. पूरक वस्तुएँ (biens complémentaires):

जिनका;, कार-पैट्रोल, -, -मक्खन आदि।

में

vi), फैशन, आदि (goût, mode, etc.):

माँग,, आदि। विशेष।

( vii) में कीमत परिवर्तन की Change (changement de prix attendu dans le futur):

नियन्त्रण, की, अतिरिक्त जनसंख्या परिवर्तन,,, का


Essai n ° 4. माँग के प्रकार ( Types de demande):

मुख्य सकता सकता है:

(1) माँग (demande de prix):

से 'अन्य बातें समान' तो हो

बातें

Courbe prix-demande) (Négative) वाले माँग 1 में प्रदर्शित किया गया।

DD बायें से माँग OP पर वस्तु की माँग OQ है। के OP से OP 1

अन्य OQ OQ 1 जाती है।

(2) माँग (demande de revenus):

माँग Cur को अर्थशास्त्री (Engel) नाम पर (Courbe de Engel) कहा जाता है।

वस्तु होती है।

वर्गों सकती हैं:

je. वस्तुएँ (marchandises supérieures),

ii. वस्तुएँ (Marchandises inférieures).

je. श्रेष्ठ वस्तुएँ (Marchandises supérieures):

सम्बन्ध धनात्मक का ।

की व्याख्या चित्र 2 की गई है। में DD आय माँग वक्र (वस्तुओं के लिए) बताता है। OY स्तर पर माँग OQ है। में OY से OY 1 OQ OQ 1 जाती है।

ii. घटिया वस्तुएँ (Marchandises inférieures):

वे;, अनाज,, कपड़ा आदि।

में जैसे जैसे जैसा चित्र 3 गया है।

DD घटिया वस्तुओं बताता है। OY माँग OQ है। स्तर में OY 1

माँग के इस विरोधाभास (paradoxe) इंग्लैण्ड के अर्थशास्त्री रॉबर्ट रॉबर्ट G (Robert Giffin)

(3) अथवा तिरछी माँग (demande croisée):

समान रहने X की माँग Cross में,

व्स्तुएँ सकती हैं:

je. स्थानापन्न वस्तुएँ (Biens de remplacement):

वे दूसरे;, चाय-कॉफी। में (स्थानापन्न) की होगी।

स्थिति को चित्र 4 दिखाया गया है। में DD वक्र है।। Y की कीमत OP y स्थानापन्न वस्तु की माँग OX 1 । Y वस्तु की कीमत बढ़कर OP बढ़कर

ii. पूरक वस्तुएँ (biens complémentaires):

वे;, स्कूटर-पैट्रोल। की

पूरक 5। में DD पूरक रेखा है। Y वस्तु की कीमत OP 1 OP 2 Y वस्तु की X की OX 1 1 OX 2 2 है

के अन्य प्रकार ( Peu d'autres types de demande):

( i) माँग (demande conjointe):

पूरक रूप है। ही;, गेंद-बल्ला, जूता-, -, । में सकता।

( ii) माँग (demande dérivée):

ही, तो;, है

( iii) माँग (demande composite):

;, कोयला, बिजली, आदि। प्रयोगों में, भोजन, इंजन, ।


Essai n ° 5. Law का नियम ( loi de la demande):

नियम वस्तु के के Qual (qualitatif) को बताता है। उपभोक्ता अपनी मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति के अनुसार अपने व्यवहारिक जीवन में ऊँची कीमत पर वस्तु की कम मात्रा खरीदता है और कम कीमत पर वस्तु की अधिक मात्रा । उपभोक्ता की इसी मनोवैज्ञानिक उपभोग प्रवृत्ति पर माँग का नियम आधारित है ।

माँग का नियम यह बतलाता है कि 'अन्य बातों के समान रहने पर' (Other Things Being Equal) वस्तु की कीमत एवं वस्तु की मात्रा में विपरीत सम्बन्ध (Inverse Relationship) पाया जाता है । दूसरे शब्दों में, अन्य बातों के समान रहने की दशा में किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि होने पर उसकी माँग में कमी हो जाती है तथा इसके विपरीत कीमत में कमी होने पर वस्तु की माँग में वृद्धि हो जाती है ।

मार्शल के अनुसार, ”कीमत में कमी के फलस्वरूप वस्तु की माँगी जाने वाली मात्रा में वृद्धि होती है तथा कीमत में वृद्धि होने से माँग घटती है ।”

सैम्युलसन के शब्दों में, ”दिये गये समय में अन्य बातों के समान रहने की दशा में जब वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है तब उसकी कम मात्रा की माँग की जाती है…….व्यक्ति कम कीमत पर अधिक वस्तुएँ खरीदते हैं और अधिक कीमत पर कम वस्तुएँ खरीदते हैं ।”

उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि दी गई स्थिर दशाओं के अन्तर्गत वस्तु की कीमत और वस्तु की माँग में एक विपरीत सम्बन्ध पाया जाता है ।

अर्थात् , जहाँ:

P = वस्तु की कीमत

Q = वस्तु की माँग

समीकरण (1) बताता है कि कीमत बढ़ने पर माँग घटेगी तथा कीमत घटने पर माँग बढ़ेगी ।

संक्षेप में, माँग का नियम एक गुणात्मक कथन (Qualitative Statement) है, मात्रात्मक कथन (Quantitative Statement) नहीं । यह नियम केवल कीमत और माँग के परिवर्तन की दिशा बतलाता है, परिवर्तन की मात्रा को नहीं ।

'अन्य बातें समान रहें' वाक्यांश का अर्थ (Meaning of 'Other Things Being Equal'):

माँग के नियम की क्रियाशीलता कुछ मान्यताओं पर आधारित है ।

दूसरे शब्दों में , निम्नलिखित मान्यताओं के अन्तर्गत माँग का नियम क्रियाशील होता है:

1. उपभोक्ता की आय में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए (Consumer's Income Should Remain Constant) ।

2. उपभोक्ता की रुचि, स्वभाव, पसन्द, आदि में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए (Consumer's Taste, Nature, like etc. Should Remain Constant) ।

3. सम्बन्धित वस्तुओं की कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए (Prices of Related Goods Should Remain Constant) ।

4. किसी नवीन स्थानापन्न वस्तु का उपभोक्ता को ज्ञान नहीं होना चाहिए (Consumer Remains Unknown with a New Substitute) ।

5. भविष्य में वस्तु की कीमत में परिवर्तन की सम्भावना नहीं होनी चाहिए (No Possibility of Price Change in Future) ।


Essay # 6. माँग तालिका ( Demand Schedule):

किसी दिये समय पर वस्तु की विभिन्न कीमतों एवं उन कीमतों पर माँगी जाने वाली वस्तु की मात्राओं के पारस्परिक सम्बन्धों को बताने वाली तालिका माँग तालिका कहलाती है ।

दूसरे शब्दों में, एक निश्चित समय पर बाजार में दी गई विभिन्न कीमतों पर वस्तु की जितनी मात्राएँ बेची जाती हैं यदि इस सम्बन्ध को (अर्थात् कीमत व माँग के सम्बन्ध को) एक तालिका के रूप में व्यक्त किया जाये तो यह माँग तालिका कहलाती है ।

उदाहरण – माँग तालिका के विचार को एक काल्पनिक उदाहरण से समझा जा सकता है:

उपर्युक्त तालिका को यदि ग्राफ पेपर पर खींचा जाय तो चित्र 6 की भाँति हमें DD वक्र प्राप्त होता है । यही माँग वक्र है ।


Essay # 7. माँग के नियम की व्याख्या ( Explanation of Law of Demand):

अब प्रश्न उठता है कि माँग वक्र बायें से दायें गिरता हुआ क्यों होता है ? दूसरे शब्दों में, माँग का नियम क्यों लागू होता है ?

कीमत में वृद्धि होने पर माँग में कमी करने और कीमत में कमी होने पर माँग में वृद्धि करने वाले उपभोक्ता के व्यवहार के निन्नलिखित कारण हैं:

(i) घटती सीमान्त उपयोगिता नियम (Law of Diminishing Marginal Utility):

माँग का नियम घटती सीमान्त उपयोगिता नियम पर आधारित है । इस नियम के अनुसार उपभोक्ता द्वारा वस्तु की अतिरिक्त इकाइयों का उपभोग करने पर वस्तु की सीमान्त इकाइयों की उपयोगिता क्रमशः घटती जाती है । सीमान्त इकाइयों की घटती उपयोगिता के कारण उपभोक्ता वस्तु की अतिरिक्त इकाइयों की कम कीमत देना चाहता है ।

दूसरे शब्दों में, जैसे-जैसे उपभोक्ता वस्तु की अधिक इकाइयों का क्रय करेगा वैसे-वैसे वह वस्तु की कम कीमत देगा अर्थात् कम कीमत पर वस्तु की अधिक मात्रा खरीदी जायेगी ।

इसी प्रकार जब उपभोक्ता वस्तु की कम इकाइयों का उपभोग करता है तब कम वस्तु के कारण उसे ऊँची सीमान्त उपयोगिता मिलती है जिसके कारण उपभोक्ता ऊँची कीमत देने को तैयार रहता है । दूसरे शब्दों में, कम उपभोग के कारण ऊँची उपयोगिता उपभोक्ता को वस्तु की ऊँची कीमत देने को प्राप्त करती है अर्थात् ऊँची कीमत पर कम मात्रा क्रय की जाती है । यही माँग का नियम है ।

में ,

प्रकार ,

(ii) क्रय-शक्ति में वृद्धि अर्थात् आय प्रभाव (Increase in Purchasing Power or Income Effect):

वस्तु की कीमत में कमी होने पर उपभोक्ता की वास्तविक आय (अथवा क्रय-शक्ति) में वृद्धि होती है जिसके कारण उपभोक्ता को अपना पूर्व उपभोग स्तर बनाये रखने के लिए पहले की तुलना में कम व्यय करना पड़ता है । दूसरे शब्दों में, वस्तु की कीमत में कमी होने के कारण उपभोक्ता पहले किये जाने वाले कुल व्यय में ही अब वस्तु की अधिक मात्रा खरीद सकता है ।

इस प्रकार वस्तु की कीमत में कमी होने पर वस्तु का अधिक क्रय सम्भव हो पाता है । यही माँग का नियम है । इसके विपरीत वस्तु की कीमत में वृद्धि के कारण उपभोक्ता की वास्तविक आय (अथवा क्रय-शक्ति) में कमी होती है जिसके कारण वस्तु का उपभोग घट जाता है । यही माँग का नियम है ।

प्रकार ,

( iii) प्रतिस्थापन प्रभाव (Substitution Effects):

वस्तु की कीमत एवं माँग के विपरीत सम्बन्ध (अथवा ऋणात्मक सम्बन्ध) का कारण प्रतिस्थापन प्रभाव है । जब एक ही आवश्यकता की पूर्ति दो या अधिक वस्तुओं से सम्भव होती है तब अन्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहने की दशा में एक वस्तु की कीमत का परिवर्तन मूल वस्तु के उपभोग में इसलिए परिवर्तन कर देता है क्योंकि उपभोक्ता मूल वस्तु एवं स्थानापन्न वस्तु के प्रयोग अनुपात में परिवर्तन कर देता है । यही प्रतिस्थापन प्रभाव (Substitution Effect) है ।

उदाहरणार्थ, चीनी और गुड़ एक ही उद्देश्य की पूर्ति करते हैं । चीनी और गुड़ में यदि चीनी की कीमत में कमी हो जाती है तब अनेक उपभोक्ता गुड़ का उपभोग छोड़कर चीनी के उपभोग पर प्रतिस्थापित हो जायेंगे जिसके कारण चीनी की माँग में वृद्धि हो जायेगी ।

इसके विपरीत यदि चीनी की कीमत में वृद्धि होती है तब अनेक उपभोक्ता चीनी का उपभोग न कर पाने के कारण गुड़ के उपभोग पर प्रतिस्थापित हो जायेंगे जिसके फलस्वरूप चीनी की माँग में कमी हो जायेगी । इस प्रकार स्पष्ट है कि प्रतिस्थापन प्रभाव के कारण वस्तु की कीमत कम होने पर उसकी माँग बढ़ती है और कीमत के बढ़ने पर माँग घटती है ।

( iv) क्रेताओं की संख्या में परिवर्तन (Change in Consumer ' s Number):

वस्तु की कीमत पर परिवर्तन उपभोक्ता की संख्या को भी प्रभावित करता है । जब किसी वस्तु की कीमत में कमी होती है, तो कुछ ऐसे उपभोक्ता भी उस वस्तु का उपभोग करने लगते हैं जो आरम्भ में ऊँची कीमत के कारण उपभोग करने में असमर्थ थे । ऐसी दशा में वस्तु की माँग बढ़ जाती है ।

इसके विपरीत जब किसी वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है तो अनेक उपभोक्ता अपनी सीमित आय के कारण उस वस्तु का उपभोग बन्द कर देते हैं जिसके कारण वस्तु की माँग घट जाती है । यही माँग का नियम है ।


Essay # 8. माँग के नियम के अपवाद ( Exceptions to Law of Demand):

कुछ दशाओं में कीमत और माँग का प्रतिलोम सम्बन्ध क्रियाशील नहीं होता । ऐसी दशाओं को नियम का अपवाद कहा जाता है ।

निम्नलिखित हैं:

( i) भविष्य में कीमत वृद्धि की सम्भावना (Expected Rise in Future Price):

कुछ भावी प्रत्याशित परिस्थितियों के कारण जैसे युद्ध, अकाल, क्रान्ति, सरकारी नीति, सीमित पूर्ति जैसी सम्भावनाओं में कीमत वृद्धि के बावजूद माँग में उत्तरोत्तर वृद्धि होती चली जायेगी क्योंकि उपभोक्ता भविष्य में और कीमत वृद्धि की आशंका से वर्तमान में माँग को बढ़ा देगा ।

ऐसी दशा में कीमत और माँग में प्रतिलोम सम्बन्ध न होकर सीधा सम्बन्ध (Direct Relationship) होता है और माँग वक्र बायें से दायें ऊपर की ओर चढ़ता हुआ बन जाता है ।

( ii) प्रतिष्ठासूचक वस्तुएँ (Prestigious Goods):

प्रतिष्ठासूचक वस्तुओं में मिथ्या आकर्षण (False Show) के कारण माँग का नियम क्रियाशील नहीं होता । समाज का धनी वर्ग अपनी श्रेष्ठता प्रदर्शित करने के लिए ऊँची कीमत वाली वस्तुओं का अधिक क्रय करता है । हीरे-जवाहरात, बहुमूल्य आभूषण, कीमती कलाकृतियाँ आदि वस्तुओं की माँग पर कीमत परिवर्तन का प्रभाव नहीं पड़ता ।

वास्तविकता तो यह है कि इन वस्तुओं की कीमतों में जैसे-जैसे वृद्धि होती जाती है धनी वर्ग मिथ्या आकर्षण के वशीभूत होकर इन वस्तुओं की माँग भी बढ़ाता जाता है ।

( iii) उपभोक्ता की अज्ञानता (Ignorance of Consumer):

जब उपभोक्ता अपनी अज्ञानता के कारण ऊँची कीमत देकर यह अनुभव करता है कि उसने अधिक टिकाऊ एवं श्रेष्ठ वस्तु खरीदी है तब ऊँची कीमत माँग को प्रभावित नहीं करती ।

उसके अतिरिक्त जब किसी वस्तु की कीमत घटाई जाती है तब उपभोक्ता अपनी अज्ञानता के कारण कम कीमत वाली वस्तु को घटिया समझकर उपभोग नहीं करता । ऐसी दशा में कीमत घटने पर उपभोग अधिक होने के स्थान पर कम हो जाता है और माँग का नियम क्रियाशील नहीं होता ।

( iv) गिफिन का विरोधाभास (Giffin ' s Paradox):

जब उपभोग की दो वस्तुओं में एक घटिया वस्तु (Inferior Good) हो तथा दूसरी श्रेष्ठ वस्तु (Superior Good) हो तब गिफिन का विरोधाभास उत्पन्न होता है । घटिया वस्तुएँ वे होती हैं जिनका उपभोग उपभोक्ता द्वारा इसलिए किया जाता है क्योंकि उपभोक्ता अपनी सीमित आय और श्रेष्ठ वस्तु की ऊँची कीमत के कारण कम कीमत वाली वस्तु अर्थात् घटिया वस्तु का उपभोग करता है ।

ऐसी दशा में घटिया वस्तु की कीमत में जब कमी होती है तब उपभोक्ता कीमत के घटने के कारण सृजित अतिरिक्त क्रय-शक्ति से अच्छी वस्तु का उपभोग बढ़ा देता है तथा घटिया वस्तु का उपभोग घटा देता है । इस प्रकार घटिया वस्तु की कीमत में कमी होने पर उसकी माँग में कमी होती है ।

माँग के इस विरोधाभास की ओर सर्वप्रथम इंग्लैण्ड के अर्थशास्त्री रॉबर्ट गिफिन (Robert Giffin) ने ध्यान आकृष्ट किया था । सम्मानार्थ उन्हीं के नाम पर इसे 'गिफिन का विरोधाभास' (Giffin's Paradox) के नाम से जाना जाता है ।

गिफिन विरोधाभास वाली घटिया वस्तु के माँग वक्र को चित्र 7 में दिखाया गया है । चित्र में DD घटिया वस्तु का माँग वक्र है जो बायें से दायें ऊपर की ओर बढ़ता हुआ है । OP कीमत पर उपभोक्ता घटिया वस्तु की OQ मात्रा क्रय करता है ।

जब उपभोक्ता की क्रय-शक्ति में, घटिया वस्तु की कीमत घटने (चित्र में OP से OP 1 ) से वृद्धि होती है तब उपभोक्ता घटिया वस्तु का उपभोग OQ से OQ 1 तक घटाकर श्रेष्ठ वस्तु की ओर उपभोग बढ़ा देता है । दूसरे शब्दों में, घटिया वस्तु की कीमत घटने पर उसकी माँग में कमी होती है । यही माँग के नियम का अपवाद है ।


 

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